Mathili Poem

मिथिला-मधेश सुमिरन’

 

प्रथम सुमिरन गण्डक, कोशी

कमला-कोइला बलान केँ

दोसर हौ करैछि, उगल सूरुज

आरो दिनाभद्री बलबान केँ

 

साखी रहिहेँ गे सीया-धीया

जयबर्धन-सल्हेश…जाय् लाल केँ

उत्तर हीमालय दक्षिण गङ्गा

पूरबसँ – पश्चिम् नेपाल केँ

 

तही बीच म’ अाँतर-पाँतर

देव-पीतर महाजाल केँ

साेखा, कारीक, मीरा-मोहरम्म

आर, बुद्ध मधेशी लाल केँ

 

झूकी परिणमूअा करैछी मैथील

अपना सकल समाज केँ

अहि तीर्हुतिकेँ माटि-पानि, हल-जन

आरो धन्य-धान अनाज केँ

 

वीरेन्द्र कुशवाहा

सिरहा अर्नमा गाउँपालिका-३ २०७७/०१/२६]

 

 


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